Free Hindi eBooks

देश जब आज़ाद हुआ तो तमाम ब्रिटिश फौजी अफसरों की तरह आयरिश मूल के नौजवान अफसर के सामने भी दो विकल्प थे, पहला, वापस अपने देश चला जाए, दूसरा वो चाहे तो हिंदुस्तान/पाकिस्तान की फौज के साथ ही बना रहे. लगभग सभी ब्रिटिश फौजियों ने पहला विकल्प ही चुना लेकिन इस नौजवान अफसर ने भारत में अपनी रेजिमेंट के साथ रहने का फैसला किया. इसके बाद की तो एक अतुल्य कहानी है. इस अफसर ने रेजिमेंट के साथ हिंदुस्तान के लिए जंग लड़ी, रिटायरमेंट केबाद भी इस अफसर के लिए रेजिमेंट ही सब कुछ थी और इंसानी दुनिया छोड़ने के बावजूद वो आज भी अपनी रेजिमेंट के साथ ही है. ये अफसर थे डेसमंड हायड. यूनाइटेड किंगडम में आयरलैंड के एक्सेटर में 28 नवम्बर 1926 को जन्मे डेसमंड हायड ने इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून में ट्रेनिंग के बाद 12 सितम्बर 1948 को भारतीय फौज की जाट रेजिमेंट के साथ कमीशन…

Ver o post original 1.316 mais palavras

Deixe um comentário

Preencha os seus dados abaixo ou clique em um ícone para log in:

Logotipo do WordPress.com

Você está comentando utilizando sua conta WordPress.com. Sair /  Alterar )

Foto do Google

Você está comentando utilizando sua conta Google. Sair /  Alterar )

Imagem do Twitter

Você está comentando utilizando sua conta Twitter. Sair /  Alterar )

Foto do Facebook

Você está comentando utilizando sua conta Facebook. Sair /  Alterar )

Conectando a %s

Este site utiliza o Akismet para reduzir spam. Saiba como seus dados em comentários são processados.