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Suprabhat jai shree radhe krishna श्रीकृष्ण की व्रज में आनन्द बांटने की बाललीला…………. कृष्णावतार आनन्द अवतार है। भगवान श्रीकृष्ण व्रज के सुख की टोकरी सिर पर लेकर ढोते हैं और व्रज की गलियों में कहते फिरते हैं–आनंद लो आनंद एक दिन नंद के दुलारे श्रीकृष्ण प्रात:काल जल्दी उठकर अपनी बालसुलभ क्रीड़ाओं से यशोदामाता को बहुत खिझाने लगे। यशोदामाता ने कई बार समझाया–कन्हैया उत्पात मत कर। आज मुझे बहुत काम है पर कन्हैया ने एक नहीं सुनी। खीजकर मैया ने उन्हें घर से बाहर सखाओं के साथ जाकर खेलने को कह दिया। श्रीकृष्ण तो मानो इसी ताक में थे। आज उन्हें अपनी बाललीला में कुछ नवीन रंग भरने थे। वात्सल्य-प्रेम में आकण्ठ डूबी हुई किसी गोपी को अपनी बाललीला के द्वारा कृतार्थ करना था। इसलिए वे मैया से डरने का बहाना करके यमुनातट की ओर भाग चले। श्रीकृष्ण का मनोहारी स्वरूप छोटे से कृष्ण हैं, पीली धोती धारण किये, उसके ऊपर…

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